Sunday, January 4, 2009

"सार्थकता"

स्पर्श भर
लहर का
भिगो दे मन का सारा आकाश,

तब तो सार्थकता है सागर की ;

वरना
धूल बन कर
आंखों में चुभने की आदत तो
हर किसी सूखी आंधी में होती ही है !!

5 comments:

RT said...

Wah Wah ! Kya baat hai! Wonderful lines

seema gupta said...

स्पर्श भर
लहर का
भिगो दे मन का सारा आकाश,
तब तो सार्थकता है सागर की ;
" सिर्फ़ एक लहर का स्पर्श और अताह सागर की सार्थकता.....भावनाओ की गहराई की बेजोड़ प्रस्तुती... "
regards

Irshad said...

very creative person............really orignal

Irshad said...

very creative person............really orignal

अल्पना वर्मा said...

स्पर्श भर
लहर का
भिगो दे मन का सारा आकाश,
तब तो सार्थकता है सागर की ;


बेहद...बेहद खूबसूरत पंक्तियाँ है...

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