Thursday, February 19, 2009

यार फ़िल्म है , इसे फ़िल्म ही रहने दो !

लीजिये ! फ़िल्म वीर को चार दिन और , उसी किले में शूटिंग की इजाज़त मिल गयी -जहाँ पहले शूटिंग क्र्यू द्बारा किले को नुक्सान पहुंचाने की बात हो रही थी , या जहाँ एक पुरानी दीवार ध्वस्त ही हो गयी थी ! राजस्थान सरकार का कहना है कि फ़िल्म निर्माता को इस नुक्सान के लिए बीस लाख रुपये का जुर्माना कर दिया गया है ..... !
वाह ! यह भी खूब रही ! कल कोई और फ़िल्म वाला लाल किले के किसी हिस्से को तोड़ देगा और सरकार उससे कुछ करोड़ रुपय्ये लेकर बात को रफा दफा कर देगी ! तो ठीक है....जिन लोगों ने बाबरी मस्जिद पूरी की पूरी ध्वस्त कर डाली उनसे भी कुछ माल मत्ता लेकर मसला ख़तम करो ना !

मेरे देखे यह शर्मनाक है ! किसी को भी - किसी भी तरह से हमारी प्राचीन धरोहर से खिलवाड़ करने का अधिकार नही है ! समय के वक्षस्थल पर किए गए इन हस्ताक्षरों को किसी भी तरह रुपय्यों के तराजू में नही तोला जा सकता ! इन्ही दिनों आमिर खान द्वारा अभिनीत एक विज्ञापन के माध्यम से यह प्रचारित किया जा रहा है कि प्राचीन इमारतों पर कुछ भी लिखना या उन्हें किसी भी तरह से नुक्सान पहुंचाना एक दण्डनीय अपराध है ....और दूसरी तरफ़ यह किस्सा ! क्या दण्डनीय का अर्थ केवल जुर्माने तक ही सीमित है ? मैं समझता हूँ कि ऐसे हर शख्स के लिए कड़ी से कड़ी सज़ा का प्रावधान होना चाहिए !

बाकी एक बात मेरे पल्ले बिल्कुल नही पड़ रही वोह यह कि जब फिल्मों में नकली ज़हर पिया जाता है, नकली बम्ब या गोली बन्दूक चलते हैं, नकली रोमांस होता है ...अदाकार कैमरे के सामने भिन्न भिन्न रूप धर कर केवल अभिनय ही करते हैं तो फ़िर इन्हे असली लोकेशन की ज़रूरत क्योकर आन पड़ती है ? सलमान खान को घोडे पर बैठा कर असली किले में घुमाने की क्या ज़रूरत पड़ गयी ? मुंबई में हजारों एकड़ में फ़ैली फ़िल्म सिटी है....नितिन देसाई का ओपन एयर स्टूडियो है ( वही जहाँ आशुतोष गवारीकर ने अपनी फ़िल्म जोधा अकबर का सेट लगाया था ) तो ? अनिल शर्मा या उन्ही की तरह बहुत से और फ़िल्मकार असली लोकेशनों के फडडों में क्यो पड़ रहे हैं ? फ़िल्म तो वैसे भी 'मेक बिलीव ' माध्यम है ...अभी राकेश मेहरा ने अपनी फ़िल्म "दिल्ली ६" में जयपुर की गलियों को ही चाँदनी चौक बनाकर अपना काम चलाया है ....( "कभी खुशी कभी ग़म" में करन जोहर ने पुरानी दिल्ली का पूरा सेट मुंबई में लगाया था ...इसी तरह "लव स्टोरी १९४२" में डलहौजी का सेट देखने लायक था .......कई मिसालें हैं )
तो फ़िर यह अनिल शर्मा साहब वीर में क्या दिखाना चाहते हैं ? यानी कल को अगर इनकी फ़िल्म में कभी जहन्नुम का कोई दृश्य होगा तो साब जहन्नुम जाकर शूट करेंगे ? यार फ़िल्म है , इसे फ़िल्म ही रहने दो और मेहरबानी करके हमारे इतिहास के गवाह इन स्मारकों को बख्श दो....वैसे भी हमारी सरकारों के पास इनका ठीक से रख रखाव करने की न ही कोई मंशा नज़र आती है और ना ही कोई ख़ास फुर्सत ही !

हमें राजस्थान के अम्बर किले में हुई घटनाओं के लिए वहां की डेवेलपमेंट अथारिटी की मज़म्मत करनी चाहिए जिन्होंने वीर की शूटिंग के लिए अनिल शर्मा को इजाज़त दी और सरकार से अपील करनी चाहिए कि वह ऐसा कोई कानून बनाये जिसके तहत हमारी इन प्राचीन धरोहरों कि सुरक्षा को मद्देनज़र रखते हुए किसी भी हालत में इस तरह शूटिंग्स वगैरह की इजाज़त न दी जाए !

( पुनश्च: वैसे असली किला दिखा कर कौन सी यह फ़िल्म हिट हो जानी है ? )

4 comments:

Udan Tashtari said...

हिट और पिट-असली/ नकली से नहीं होता मगर इन धरोहरों को शूटिंग के लिए परमिशन देकर काफी पैसा मिलता है मेन्टेनेन्स के लिए. अब किराये के लिए दिए मकान में टूट फूट भी लाजिमी है. वरना तो पैसों के आभाव में वो वैसे भी खंडहर हो लेंगे. मेरे पास उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह बात कह रहा हूँ.

अल्पना वर्मा said...

aap ki baat se sahmat hun..abhi kuchh dino pahle hi amer ke kiley ke baare mein aalekh likha tha main ne...us ki history jaankar bahut achchambha hua tha---1570 mein baney is kiley mein shooting ki permission de kar rajsthan sarkaar bahut galat kar rahi hai...

yah historical places ka misuse hi hai

- rajasthan high court ka yah durbhagyapurn faisla hai

विक्षुब्ध सागर said...

आपकी बात सही है लेकिन मेन्टेनेन्स के लिए आख़िर सरकार को किसी किरायेदार का ( यानि इन फ़िल्म वालों ) का मुंह क्यो ताकना पड़ता है ? क्या इन धरोहरों की मेन्टेनेन्स के लिए ख़ुद के खजाने में से धन उपलब्ध नही कराया जा सकता ? हमें यह नही भूलना चाहिए कि यह इमारतें हमारे इतिहास की धरोहर हैं , कोई आम मकान नही कि जिसके किराये पर हम इनकी टूट फ़ुट ठीक करवाते फिरे .....! इनको पहुँचा छोटा सा नुक्सान भी काफी भरी पड़ सकता है !

शेष अन्यथा न लें ...यह मेरी निजी राय है ! आपकी टिप्पणी के लिए आभारी हूँ !

Harkirat Haqeer said...

Vichubd ji , mujhe yaad hai aapki kavitayen maine kahin padhi thi ...kirpya link den...!!

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