Monday, December 1, 2008

नया ' टेरर म्युज़िअम ' : हमारा ताज

"साहिबान ...हाँ जी ! ज़रा मैं आपका ध्यान इधर चाहूँगा ...यह देखिये , यह वोह कमरा है जिसके बाहर वो लंबा वाला आतंकवादी मारा गया गया था ...और उधर आपके दाहिने हाथ ...वोह निशान है हमारे कमांडो द्वारा दागी गयी गोलियों का ....अब ज़रा आगे आयें...."

हाँ..इसी तरह तो घुमाते हैं ना टूरिस्ट गाइड किसी भी दर्शनीय स्थल में लोगों को ! क्यों ना ताज होटल को एक ऐसा ही पर्यटन स्थल बना दिया जाए ? ऐसा पर्यटन स्थल जहाँ लोग सरे आम दहशत के , हैवानियत के नंगे नाच के निशान देख सके .... मौत ने कहाँ कहाँ कैसे कैसे तांडव किया उसका तमाशा देख सकें ....! एक टेरर म्युजियम !

कुछ अटपटा सा लग रहा है ना ? कुछ आजीब सा ?....लेकिन हमारे चीफ मिनिस्टर साहब को तो ऐसा नहीं लगा !
वो तो बड़े ही मज़े के साथ , नहा धोकर घटना स्थल का मुआयना करने गए थे और साथ में अपने प्यारे पुत्र को भी लेते गए.....' देखो बेटा ! ऐसे होते हैं आतंक के निशान ! दीवार जलने के बाद इस तरह से काली हो जाती हैं...और राम गोपाल जी आप भी ज़रा ध्यान से देख लें ... आपके तो बड़े काम की चीज़ है यह सब ! फिल्मों में यथार्थ चित्रण के लिए इससे बढ़िया तैयार माल मसाला और कहाँ मिलेगा ...एकदम फर्स्ट हैण्ड मेटेरिअल ! "

वाह जनाब ! लाशों पर पिकनिक मनाना तो कोई आपसे सीखे ! भई सुपर स्ट्रोंग राजनीतिज्ञ हैं कोई मजाक थोड़े ही न है ....! एकदम पक्की हड्डी ! वरना मिडिया के यह बात उठाने पर ऐसा नहीं कह पाते की राम गोपाल के वहां होने में ऐसी तो कोई ख़ास बात नही है...वे तो मेरे बेटे के साथ यूँ ही आ गए !


वैसे यहाँ एक बात यह भी सामने आती है की सी एम् साहब की इस गैर जिम्मेदाराना हरकत के लिए क्या सिर्फ़ वही दोषी हैं ? जब अमेरिका पर ९ / ११ का हमला हुआ था तो उस घटना स्थल पर कम से कम एक हफ्ते तक किसी को भी वहां जाने की इजाज़त नही दी गयी थी.....! ग्राउंड जीरो पूरी तरह से सेना के काबिज़ था ! होना भी चाहिए ...और शायद ऐसा ही यहाँ ताज और ओबेराय होटल के सन्दर्भ में भी हुआ ही था ! आर्मी ने सभी कुछ अपने कब्जे में ले लिया था ! तो ऐसे में रितेश देशमुख और रामगोपाल वर्मा समेत और भी कई लोग घटना स्थल पर जाने कैसे दिए गए ? सुरक्षा एजेंसियों को इस बात की पूरी ज़िम्मेदारी अपने ऊपर लेनी होगी की आख़िर उन्हों ने ऐसे संवेदनशील स्थल पर , जहाँ अभी कई तरह की जांचें चल रही हैं, इस बेमतलब भीड़ को अन्दर कैसे जाने दिया !
यह जवाबदेही उनकी बनती ही है !
सेना तथा पुलिस की ऐसी अनुशासनहीनता की कड़ी निंदा होनी ही चाहिए ! यही तो इस सिस्टम की कमी है ! राजनेता हमेशा इसी के चलते ही तो अपनी मनमानी करने में सफल रहतें हैं !

यह यहीं ...इस देश में ही हो सकता है की कोई नेता जब चाहे किसी विमान को उड़ने से रोक ले .....एयर पोर्ट पर वह किसी सुरक्षा जांच का मोहताज नहीं है.....मेटल डिटेक्टर से होकर गुज़रना उसकी शान के ख़िलाफ़ है......और कभी कोई रेलगाडी उसे लिए बिना स्टेशन छोड़ दे तो वह बेझिझक रेलवे के कर्मचारियों को पीटने में भी गुरेज़ नही करेगा !
यह इंडिया है मेरी जान ! it happens only in india !

तो अगर ऐसे में हमारे सी एम् साहब अपनी तमाम संवेदनाये ताक़ पे रखकर ...ना सिर्फ़ ऐसी गैरजिम्मेदाराना हरकते करते हैं बल्कि निहायत बेशर्मी से इस मुद्दे का, अपनी खोखली दलीलें देते हुए, सामना भी करते हैं तो हमें शिकायत क्योकर होनी चाहिए ? भई हमारे आका हैं ...वोह जो मुनासिब समझेंगे , करेंगे ! काहे हम अपनी खोपडी ख़राब कर रहे हैं , ऐसी फिजूल की बातों में !

तो फ़िर हो जाए ......

लगाइए टिकेट और बनाइये ताज का, ओबेराए का, नरीमन हॉउस का टेरर म्युजियम...और देखिये तमासा ...!!!

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